सुबह
आज की सुबह
कितनी सुहानी है...
चाय के प्यालो के साथ
जब मैं तुम्हारे चेहरे से
हटाती हूँ अख़बार
हर बार तुम यही कहते हो...
और फिर वह मुस्कुराहट
जो मेरे चेहरे पर आती है
तुम कहते हो
अहा !
कितना सुंदर फूल खिला है
मेरे हाथों को
अपने हाथों में थामकर
मुझे यकीन दिलाते हुये
लम्बी सांसो के साथ
हवा को महसूस कर कहना
देखो तभी तो हवा इतनी सुगन्धित है.....
मेरे गीले बालों से टपकती
नन्ही बूँदों को
अपनी उँगली के पोरों पे टिका
आसमान की तरफ सर उठा कर कहना
लगता है बारिश का अंदेशा है . .
फिर खिलखिलाहटों का दौर्
चाय की चुस्कियाँ
और प्रेम में पके अल्पाहार...
तुम्हारे हाथों में जादू है
तुम सच मे अन्नपूर्णा हो
बस अब दिन अच्छा गुजरेगा....
तुम जो हो.....
कुछ ऐसी ही
हर रोज की कहानी हैं
माना थोड़ी रूमानी है
पर सुबह बहुत सुहानी है
हम दोनों की.....
......अन्नपूर्णा गुप्ता ......
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