माँ
माँ
तुम हो शमा ....
खुद जल कर
करती हो रोशन
हमारा जहाँ.....
हर इम्तिहान में
मैं रातो को जागती थी
पर तुम भी कहाँ सो पाती थी
कभी दूध का गिलास
तो कभी कॉफ़ी की मिठास
और उठ जाती थी
मुझ से भी पहले
बाकी है
तेरी हथेलियों की गरमाहट
मेरे माथे पर
और बालो में घुमती
तेरे उंगलियों के अहसास
मेरे कपड़ो को ढूंढ़ ढूंढ़ कर
तेरा संभालना
मुझे जिसकी जरूरत हो
मुझसे भी पहले समझ जाना
मेरे हर कदम पर
मुस्कुराकर अपना आँचल बिछाना
लडखडाने पर
झट से अपने हांथो से थाम लेना
मुझसे दूर होने की बातों पर
तेरी आँखों में पानी आना
मेरी आने की खबर पर
तेरा खिड़की पर बार बार आना
तुझमे पाया है मैंने माँ
स्नेह का आसमां
माँ
तुम हो शमा
जो खुद जलकर
करती हो रोशन
हमारा जहाँ
माँ प्यारी माँ
Happy mother's day
......अन्नपूर्णा गुप्ता ....
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