अन्नपूर्णा गुप्ता
02/11/2017
प्यार की कहानी
सूख गयी थी....
वक्त के रेगिस्तानों में कहीं
जाने कैसे तेरी यादें...
आज
तरल हो गयी....
बादल की तरह छा गयी
हृदय में एकाएक
मानो सावन आ गया
और ये आँखे ...
अचानक
कुछ सजल हो गयी....
जाने कितने ही ख़तों को सहेजा
हर बार
उनकी राख से
हथेलियां रंगती गयी....
मैं नही चाहती थी
तुम कहो
कि ...
मेरी तरफ से
पहल हो गयी.....
खामोशियों के पन्नो पे छिपी
प्यार की कहानी
तुम कभी पढ़ ही नही पाए
और मैं ....
लिखती चली गयी....
सचमुच मेरी जिंदगी
एक अनछुई... प्यारी सी
ग़ज़ल हो गयी......
02/11/2017
प्यार की कहानी
सूख गयी थी....
वक्त के रेगिस्तानों में कहीं
जाने कैसे तेरी यादें...
आज
तरल हो गयी....
बादल की तरह छा गयी
हृदय में एकाएक
मानो सावन आ गया
और ये आँखे ...
अचानक
कुछ सजल हो गयी....
जाने कितने ही ख़तों को सहेजा
हर बार
उनकी राख से
हथेलियां रंगती गयी....
मैं नही चाहती थी
तुम कहो
कि ...
मेरी तरफ से
पहल हो गयी.....
खामोशियों के पन्नो पे छिपी
प्यार की कहानी
तुम कभी पढ़ ही नही पाए
और मैं ....
लिखती चली गयी....
सचमुच मेरी जिंदगी
एक अनछुई... प्यारी सी
ग़ज़ल हो गयी......
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