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जाने कब हम ओंस बन
पत्ते से फिसल गये
पता ही नही चला...
कब मचलती बूँद में
बदल गए
पता ही नही चला....
हमने तो सोचा
हम सीप में गिर मोती बनेंगे
कब रेत में मिल गये
पता ही नही चला....

अन्नपूर्णा गुप्ता

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